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Saturday, July 9, 2016

कुछ हम चले कुछ तुम

कुछ हम चले कुछ तुम


अपनी गृहस्थी को कुछ इस तरह बचा लिया
कभी आँखें दिखा दी कभी सर झुका लिया

आपसी नाराज़गी को लम्बा चलने ही न दिया
कभी  वो  हंस पड़े  कभी मैं मुस्करा दिया

रूठ कर बैठे  रहने से  घर भला कहाँ चलते हैं
कभी उन्होंने गुदगुदा दिया कभी मैंने मना लिया

खाने पीने  पे  विवाद कभी होने  ही  न दिया
कभी गरम खा ली कभी बासी से काम चला लिया

मीया हो या बीबी महत्व में कोई भी कम नहीं
कभी खुद डॉन बन गए कभी उन्हें बॉस बना दिया

For All Couples

साभार : अज्ञात । नोट : मेरी रचना नही है ।।

7 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (18-07-2016) को "सच्ची समाजसेवा" (चर्चा अंक-2407) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. Do you have any tips on how to get listed in Yahoo News? I’ve been trying for a while but I never seem to get there!
    Appreciate it

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